2026-05-19 17:34:22
नई दिल्ली / भव्य खबर । वरिष्ठ चिकित्सक डॉ. पंकज सोलंकी ने डॉक्टरों के मानसिक स्वास्थ्य से जुड़े गंभीर मुद्दों पर जागरूकता फैलाने और चिकित्सा पेशेवरों को बिना किसी भय या सामाजिक कलंक के सहायता लेने के लिए प्रेरित करने हेतु हौसला रख (#HoslaRakh) अभियान की शुरुआत की है।
डॉ. सोलंकी ने कहा कि इस अभियान का उद्देश्य डॉक्टरों के मानसिक स्वास्थ्य पर छाई चुप्पी को तोड़ना और इस अत्यंत महत्वपूर्ण विषय को राष्ट्रीय विमर्श का हिस्सा बनाना है। उन्होंने चिंता जताई कि लगातार बढ़ता कार्यभार, लंबी ड्यूटी, नींद की कमी, संसाधनों का अभाव, मरीजों और परिजनों की अपेक्षाओं का दबाव तथा सामाजिक जिम्मेदारियों का बोझ डॉक्टरों के मानसिक स्वास्थ्य पर गहरा प्रभाव डाल रहा है।
विभिन्न अध्ययनों के अनुसार, 64 प्रतिशत डॉक्टर अत्यधिक कार्यभार को तनाव का प्रमुख कारण मानते हैं, जबकि 44 प्रतिशत मेडिकल छात्र शैक्षणिक दबाव के कारण मानसिक तनाव का अनुभव करते हैं। सबसे चिंताजनक तथ्य यह है कि लगभग 31.2 प्रतिशत चिकित्सा पेशेवरों ने जीवन में कभी न कभी आत्म-हानि या आत्महत्या जैसे विचार आने की बात स्वीकार की है।
डॉ. सोलंकी ने बताया कि देश के अनेक अस्पतालों में रेजिडेंट डॉक्टरों को नियमित रूप से 80 से 100 घंटे प्रति सप्ताह कार्य करना पड़ता है। जब इलाज करने वाला स्वयं मानसिक रूप से अस्वस्थ और अत्यधिक तनावग्रस्त हो, तो उसका प्रभाव रोगियों के उपचार की गुणवत्ता, निर्णय क्षमता, सतर्कता और संवेदनशीलता पर भी पड़ सकता है। ऐसी स्थिति में दवा लिखने में त्रुटियाँ, रोग की गंभीरता का आकलन करने में चूक, संवाद में कमी और उपचार संबंधी गलतियों की आशंका बढ़ जाती है। इससे न केवल डॉक्टरों का स्वास्थ्य प्रभावित होता है, बल्कि संपूर्ण स्वास्थ्य व्यवस्था की कार्यक्षमता और मरीजों की सुरक्षा भी प्रभावित हो सकती है।
उन्होंने कहा कि Mental Healthcare Act, 2017 प्रत्येक व्यक्ति को मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंच, गोपनीयता और समान व्यवहार का अधिकार देता है। इसके बावजूद अनेक डॉक्टर निजता भंग होने, करियर पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ने और सामाजिक कलंक के भय से सहायता लेने से बचते हैं।
हौसला रख अभियान के माध्यम से डॉ. पंकज सोलंकी एक ऐसा सहायक वातावरण तैयार करना चाहते हैं, जहाँ डॉक्टर बिना झिझक अपनी भावनात्मक कठिनाइयों के बारे में खुलकर बात कर सकें और समय पर मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंच प्राप्त कर सकें। उन्होंने जोर देकर कहा कि जो लोग समाज के स्वास्थ्य की रक्षा करते हैं, उनके मानसिक स्वास्थ्य की सुरक्षा भी उतनी ही आवश्यक है। डॉक्टरों के मानसिक स्वास्थ्य को राष्ट्रीय प्राथमिकता के रूप में लिया जाना चाहिए।